"भूल जाऊँगा?"

मोहब्बत के सारे सितम भूल जाऊँगा?
बे-असर से ज़ख़्मों के मरहम भूल जाऊँगा?
माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे
के तुझ को मैं मेरे सनम भूल जाऊँगा

तेरा लहरों सा चलना ज़ेहन में बसा है
उन आँखों की कैसे शरम भूल जाऊँगा?
चलो ना होश रहा के शुरुआत कैसे हुई
कैसे कब हुआ मैं ख़तम भूल जाऊँगा
माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे

तेरी पायल का शोर जैसे शहनाई कोई
जो पाक़ लगे वो क़दम भूल जाऊँगा?
वो सादग़ी तेरी जो नज़रें तक ना मिलीं
हँसकर सह गया जो मैं ग़म भूल जाऊँगा?
माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे

हम जुदा नहीं बस फ़ासले दौरानियाँ हैं
तुझे याद कर हर जनम भूल जाऊँगा?
प्यार मिलता नहीं जीते जी ये सुना है
मैं बेहोशी में ये भरम भूल जाऊँगा
माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे

— Rohit tewatia 'Ishq'

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