Meaning of

भरम

bharam • بھرم

भ्रम; गलतफहमी; माया

illusion; delusion; misconception

وہم; غلط فہمی; فریب

Sanskrit

तुम बिन शायद जी न पाऊँ ऐसा पहले लगता था
लेकिन अब भी ज़िंदा हूँ, या'नी भ्रम था, टूट गया

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

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मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू
मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो

ये दुनिया नहीं है मेरे पास तो क्या
मेरा ये भरम था मेरे पास तुम हो

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अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ
मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं

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ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

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मेरे तोहफ़ों ने मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
चूड़ियाँ तंग निकल आई हैं और हार खुले

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या तो भरम बना रहे इतना ख़ुदा करे
इनकार अपने होने से वरना ख़ुदा करे

मुश्किल है मेरा काम तो मिल बाँटकर करें
आधा करा दें राम जी आधा ख़ुदा करे

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बात यूँँ है कि ज़माने में बहारों का भरम
आप के नाम से है आप मेरे नाम से हो

इतनी रौशन तो कोई चीज़ नहीं होती है
आप शायद किसी सय्यारा-ए-गुमनाम से हो

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ले के ख़त उन का किया ज़ब्त बहुत कुछ लेकिन
थरथराते हुए हाथों ने भरम खोल दिया

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तुम बिन शायद जी न पाऊँ ऐसा पहले लगता था
लेकिन अब भी ज़िंदा हूँ, या'नी भ्रम था, टूट गया

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

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‘भ्रम’ अनिश्चितता और दिखावे की धोखाधड़ी प्रकृति का सार पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर वास्तविकता और धारणा के बीच की नाजुक रेखा का प्रतीक होता है, आत्मनिरीक्षण को आमंत्रित करता है।

कवि ‘भ्रम’ का उपयोग संदेह और सत्य की क्षणभंगुर प्रकृति की खोज के लिए करते हैं। यह वास्तविकता पर सवाल उठाने और मन के रहस्यों में गहराई से उतरने का एक उपकरण है।

‘भ्रम’ के नृत्य में, विश्वास और वास्तविकता का नाजुक संतुलन मिलता है।