Meaning of

भरम

bharam • بھرم

भ्रम; गलतफहमी; माया

illusion; delusion; misconception

وہم; غلط فہمی; فریب

Sanskrit

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो — Rahat Indori
ले के ख़त उन का किया ज़ब्त बहुत कुछ लेकिन थरथराते हुए हाथों ने भरम खोल दिया — Jigar Moradabadi
अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं — Jawwad Sheikh
मेरे तोहफ़ों ने मोहब्बत का भरम तोड़ दिया चूड़ियाँ तंग निकल आई हैं और हार खुले — Ahmad Abdullah
तुम बिन शायद जी न पाऊँ ऐसा पहले लगता था लेकिन अब भी ज़िंदा हूँ, या'नी भ्रम था, टूट गया — Ashraf Ali

‘भ्रम’ अनिश्चितता और दिखावे की धोखाधड़ी प्रकृति का सार पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर वास्तविकता और धारणा के बीच की नाजुक रेखा का प्रतीक होता है, आत्मनिरीक्षण को आमंत्रित करता है।

कवि ‘भ्रम’ का उपयोग संदेह और सत्य की क्षणभंगुर प्रकृति की खोज के लिए करते हैं। यह वास्तविकता पर सवाल उठाने और मन के रहस्यों में गहराई से उतरने का एक उपकरण है।

‘भ्रम’ के नृत्य में, विश्वास और वास्तविकता का नाजुक संतुलन मिलता है।