बात यूँँ है कि ज़माने में बहारों का भरमआप के नाम से है आप मेरे नाम से होइतनी रौशन तो कोई चीज़ नहीं होती हैआप शायद किसी सय्यारा-ए-गुमनाम से हो— Ahmad Abdullah