Meaning of

पाक़

paak • پاق

पवित्र; शुद्ध; निर्मल

pure; sacred; clean

پاک; مقدس; صاف

Persian

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो — Bashir Badr
ये गहरा राज़ है इस का बदन को खा ही जाती है मोहब्बत पाक होकर भी हवस तक आ ही जाती है — ALI ZUHRI
कोई तो पाकीज़ा सिफ़त पलकों में उस की थी कहीं पलकें उठीं तो चाँदनी हम ने बिखरते देखी है — Divya 'Kumar Sahab'
दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है फिर इस में अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है — Allama Iqbal
मोहब्बत एक पाकीज़ा अमल है इस लिए शायद सिमट कर शर्म सारी एक बोसे में चली आई — Munawwar Rana
है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर' पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है — Nazeer Akbarabadi

'पाक़' शब्द पवित्रता और पावनता की भावना को जागृत करता है। अपने मूल अर्थ में, यह किसी ऐसी चीज़ को संदर्भित करता है जो अछूती और निर्मल हो। कविता में यह अवधारणा अक्सर आध्यात्मिक स्तर तक उठाई जाती है, इसे दिव्य पवित्रता और नैतिक अखंडता की भावना से भर देती है।

कवि 'पाक़' का उपयोग प्रेम की पवित्रता या प्रिय के हृदय की पावनता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह अक्सर सांसारिक भ्रष्टाचार के विपरीत होता है, विषय की अछूती और दिव्य प्रकृति को उजागर करता है।

कविता में, 'पाक़' आत्मा की पवित्रता की खोज का प्रतिबिंब बन जाता है।