हर दुख सुख में साथ निभाना आता है
हम को हर इक साज़ पे गाना आता है
दिल मिलने में देर नहीं लगती है फिर
उस से जिस को हाथ मिलाना आता है
जान-ए-मन कुछ और भी आता है तुम को
या बस मुझ को छोड़ के जाना आता है
मिलती रहती है उस पेड़ की छाँव मुझे
मेरे सर तक बाप का शाना आता है
इश्क़ रहा है ऊपर दुनियादारी से
दीवाने के बा'द ज़माना आता है
— Rohit tewatia 'Ishq'















