"लव ट्राईऐंगल"
जब ख़यालों में मैं उस के पीछे पीछे जाता
भाव खाती देखो फिर मैं उस से रुठ जाता
ऐसे वैसे कैसे कैसे मुझ को वो मनाती
जान थी मेरी वो कैसे मैं ना मान पाता
अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता
तू सवाल और तेरा मैं जवाब होता
काश जो तू मेरी आँखों में वो झाँक जाती
तेरे पास में जो महका मैं गुलाब होता
अगर ये ख़्वाब सच हुआ तो सुनले ऐ हसीं
मैं पूरी उम्र तेरे दिल में ही गुज़ार दूँ
तू जो चले तो दिन हो जब रूके तो रात हो
ये काएनात तेरे क़दमों में उतार दूँ
अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता
काश जो तू बोले तेरी मैं आवाज़ होता
तू शबाब तेरी धुन में मैं शराब होता
सबके चेहरों को तो तू यूँ निहार जाती
तेरे नैनों का कभी तो मैं शिकार होता
अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता















