sach na hota ba-khuda kahtaa nahin | सच न होता बा-ख़ुदा कहता नहीं

  - Rohit tewatia 'Ishq'

सच न होता बा-ख़ुदा कहता नहीं
कोई हमने आप सा देखा नहीं

फूल भी काँटें सा फिर चुभता नहीं
काश हम दिल देखते चेहरा नहीं

चाँद का ये दाग़ ही है जान-ए-मन
चाँद गर जो आप से मिलता नहीं

मैं दिवाना हूँ दिवाना आपका
ख़ुद बताओ देखकर लगता नहीं

दुनियादारी के चलन को देखकर
मैं सियाना हो गया हूँ था नहीं

वो अगर मेरा हुनर पहचानता
ख़ुद से आकर तो कभी भिड़ता नहीं

उसके बारे में यही अच्छी है बात
लड़खड़ाता है मगर गिरता नहीं

बेवफ़ा सुन मैं नहीं अहमद फ़राज़
छोड़ के जाना है तो तू आ नहीं
'इश्क़ में हो हौसले की बात गर
मैं किसी के बाप से डरता नहीं

  - Rohit tewatia 'Ishq'

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