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हमीं ने दाव पर सब कुछ लगाया ‘इश्क़’
हमीं हर एक बाज़ी हार बैठे हैं
हमीं हर एक बाज़ी हार बैठे हैं
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इक बार अपनी माँ को मोहब्बत से देख ले
जिस को भी हुस्न-ए-ताम का मतलब नहीं पता
जिस को भी हुस्न-ए-ताम का मतलब नहीं पता
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साथ उस के किया इक सफ़र तब खुला
इश्क़ को तो फ़क़त रास्ता चाहिए
इश्क़ को तो फ़क़त रास्ता चाहिए
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तुम्हें तो मेरी जाँ मोहब्बत थी मुझ से
बिछड़ने का क्यूँ फिर मलाल अब नहीं है
बिछड़ने का क्यूँ फिर मलाल अब नहीं है
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