दर्द दिल के चलो मिटाते हैं
दीप अब प्यार का जलाते हैं
आपसे प्रेम हो गया है अब
आप को देखने को आते हैं
आँख तुम शर्म से झुकाती हो
हम तुम्हें ख़्वाब में सजाते हैं
तुम कली हो हसीन बाग़ों की
हम तुम्हें देख दिल लगाते हैं
'जीत' ऐसे न मुस्कुराओ तुम
लोग पागल तुम्हें बताते हैं
— Tiwari Jitendra















