Ashraf Ali

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@Ashraf-Ali

Ashraf Ali shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ashraf Ali's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

निकम्में हुक्मरानों की सलामी छोड़ दी मैं ने सो अब आज़ाद हूँ या'नी गुलामी छोड़ दी मैं ने — Ashraf Ali
सब महँगे ज़ेवरात की क़ीमत घटाऊँगा सोने का नाम आज से पीतल करूँँगा मैं — Ashraf Ali
तुम बिन शायद जी न पाऊँ ऐसा पहले लगता था लेकिन अब भी जिन्दा हूँ या'नी भरम था टूट गया — Ashraf Ali
मुझ को हिन्दू या मुसलमान समझने वालों मैं ने इंसान ही रहने की क़सम खायी है — Ashraf Ali

Ghazal

चाँद सितारे तोड़ के लाना मेरे बस की बात नहीं फर्ज़ी का भौकाल बनाना मेरे बस की बात नहीं सच है मुझ को तेरी आँखें बेहद प्यारी लगती हैं लेकिन उन को झील बताना मेरे बस की बात नहीं इश्क़ में बच्चा बन जाऊँगा बाबू वाबू कह लूँगा तुतलाना और थाना थाना मेरे बस की बात नहीं लव यूँ लव यूँ बोल भी दूँ मैं सुब्ह दुपहरी शाम मगर चैट पे घंटों तक बतियाना मेरे बस की बात नहीं तस्वीरों में साथ तुम्हारे होना अच्छा लगता है पाउट कर के मुँह बिचकाना मेरे बस की बात नहीं 'अशरफ़' हूँ सो मेरा नंबर अशरफ़ लिखकर सेव करो बिन शादी हब्बी कहलाना मेरे बस की बात नहीं — Ashraf Ali

Nazm

"ख़्वाब" ख़्वाब ये है कि मेरी ज़ात रहे लासानी ख़्वाब ये है कि मेरी ज़ीस्त रहे सुलतानी ख़्वाब ये है कि मेरे काम में हंगामा हो ख़्वाब ये है कि मेरी बात हुकमनामा हो ख़्वाब ये है कि दहकता हुआ इक शो'ला बनूँ ख़्वाब ये है कि मैं सूरज की सिफ़त गोला बनूँ ख़्वाब ये है कि लड़ूँ जंग और लश्कर रखूँ ख़्वाब ये है कि सिकन्दर को भी नौकर रखूँ ख़्वाब ये है कि पहाड़ों को कुचल डालूँ मैं ख़्वाब ये है कि समुंदर को निगल डालूँ मैं ख़्वाब ये है कि ज़माने को मैं रौशन कर दूँ ख़्वाब ये है कि हर इक ख़ार को गुलशन कर दूँ ख़्वाब ये है कि तमन्नाओं के सब पर खोलूँ ख़्वाब ये है कि ख़लाओं में भी दफ़्तर खोलूँ जो भी हालात हों हर हाल में बढ़ना है मुझे सारे ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलना है मुझे — Ashraf Ali