ज़ेहन से दिल की बग़ावत तो हुई होगी ना
सब को इक बार मुहब्बत तो हुई होगी ना
फ़ुर्क़त-ए-यार में रोए तो हुए होंगे सब
ग़म भुलाने में अज़ीयत तो हुई होगी ना
फ़ोन बजते ही धड़क जाता रहा होगा दिल
फ़ोन रखते हुए दिक़्क़त तो हुई होगी ना
उस के डीएम में किसी और का मैसेज पढ़ कर
यक-ब-यक आप को हैरत तो हुई होगी ना
उस ने जिस रोज़ कहा होगा कि आई लव यूँ टू
दोस्तों में कोई दावत तो हुई होगी ना
— Ashraf Ali















