मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता हैये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता हैइश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोईदिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है— Vishal Singh Tabish