जो भी मुझमें बाक़ी है गड़बड़ी निकालूँगाचाबियाँ बनाऊँगा, हथकड़ी निकालूँगाये जो तुम शरीफ़ों को धौंस देते फिरते होएक दिन तुम्हारी भी हेकड़ी निकालूँगा— Ashraf Ali