मुद्दत बा'द भी अनसुलझा है मस'ला पहली वाली का

ख़्वाब में अक्सर दिख जाता है चेहरा पहली वाली का

वो जो शर्ट दिया था उस ने कल जब पहना दोबारा
जेब के अंदर रखा मिला है झुमका पहली वाली का

बिस्तर के दाएँ जानिब जो ताक बना है कमरे में
आज भी उस
में रखा हुआ है तोहफ़ा पहली वाली का

इकलौती तस्वीर उसी की ठीक सिरहाने रखता हूँ
सोता हूँ मैं चूम के हर शब माथा पहली वाली का

वैसे तो वो ख़ाली कर के बरसों पहले चली गई
लेकिन अब तक दिल-घर पर है कब्ज़ा पहली वाली का

— Ashraf Ali

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