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पहले तो तुम्हें जान पुकारेंगे यही लोग
फिर ख़ुद ही तुम्हें जान से मारेंगे यही लोग
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ग़म-ए-हयात में यूँ ढह गया नसीब का घर
कि जैसे बाढ़ में डूबा हुआ गरीब का घर
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तुम बिन शायद जी न पाऊँ ऐसा पहले लगता था
लेकिन अब भी जिन्दा हूँ या'नी भरम था टूट गया
लेकिन अब भी जिन्दा हूँ या'नी भरम था टूट गया
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किसी के इश्क़ का सौदा हुआ है
किसी के साथ फिर धोखा हुआ है
किसी के साथ फिर धोखा हुआ है
कोई अब तक अकेले जी रहा है
किसी को दूसरा लड़का हुआ है
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घर के लिए जो वक़्त बचा कर रखा था मैं
यूँ मुफ़लिसी हुई कि उसे बेंचना पड़ा
यूँ मुफ़लिसी हुई कि उसे बेंचना पड़ा
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सारी दुनिया को अजनबी कर के
ख़ुश हूँ ख़ल्वत से दोस्ती कर के
ख़ुश हूँ ख़ल्वत से दोस्ती कर के
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