दिल को कच्चा मकान रखते हैं

और ताख़ों पे जान रखते हैं

है सुख़न आज मेरे हाथों में
जैसे चाहें कमान रखते हैं

हम परिंदे सभी मुसाफ़िर हैं
फिर भी ऊँची उड़ान रखते हैं

घोंसले हम ज़मीं पे रखते हैं
उड़ने को आसमान रखते हैं

बे-वफ़ा आप हैं सितम गर हैं
जानते हैं अमान रखते हैं

प्यार में सब अजीब पागल हैं
टूटे दिल के निशान रखते हैं

कौन जो लोग लौट आते हैं
आलसी हैं थकान रखते हैं

— Tiwari Jitendra

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Zulm Shayari

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