धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँहाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँमेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसारहाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ— Nawaz Deobandi