Shakeel Azmi

Shakeel Azmi

@shakeel-azmi

Shakeel Azmi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shakeel Azmi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

206

Content

20

Likes

1506

Shayari
Audios
  • Sher(15)
  • Ghazal(5)

Sher

लगाना बाग़ तो उस में मोहब्बत भी ज़रा रखना परिंदों के बिना कोई शजर पूरा नहीं होता — Shakeel Azmi
मेरे होंटों पे ख़ामुशी है बहुत इन गुलाबों पे तितलियाँ रख दे — Shakeel Azmi
दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले — Shakeel Azmi
अपनी मंज़िल पे पहुँचना भी खड़े रहना भी कितना मुश्किल है बड़े हो के बड़े रहना भी — Shakeel Azmi
ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो — Shakeel Azmi
तुम ने स्वेटर बुना था मिरे नाम का मैं भी लाया था कुछ सर्दियाँ जंगली — Shakeel Azmi
मैं सो रहा हूँ तेरे ख़्वाब देखने के लिए ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए — Shakeel Azmi
हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है — Shakeel Azmi
कच्ची 'उम्रों में हमें काम पर लगा दिया गया हम वो बच्चे जो जवानी से अलग कर दिए गए — Shakeel Azmi
तुम आसमान पे जाना तो चाँद से कहना जहाँ पे हम हैं वहाँ चांदनी बहुत कम है — Shakeel Azmi
आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा जानवर घर में रखे जाएँ तो इंसान से हैं — Shakeel Azmi
वो बुझ गया तो चला उस की अहमियत का पता कि उस की आग से कितने चराग़ जलते थे — Shakeel Azmi
ख़ुदा ख़ुद को समझते हो तो समझो मगर इक रोज़ मर जाना है तुम को — Shakeel Azmi
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है — Shakeel Azmi

Ghazal

आसमानों से ज़मीनों को मिलाने वाले झूटे होते हैं ये तक़दीर बताने वाले अब तो मर जाता है रिश्ता ही बुरे वक़्तों पर पहले मर जाते थे रिश्तों को निभाने वाले जो तेरे 'ऐब बताता है उसे मत खोना अब कहाँ मिलते हैं आईना दिखाने वाले बन गया ज़हर मिरी लौ का धुआँ रात गए सुब्ह उट्ठे ही नहीं मुझ को बुझाने वाले तुझ में हिम्मत है तो सूरज के मुक़ाबिल भी आ मेरे मा'सूम चराग़ों को डराने वाले अब गया है तो पलट कर मुझे आवाज़ न दे लौट के मत आ मुझे छोड़ के जाने वाले पर्दे दरवाज़ों पे आँगन में हसीं चेहरे थे गाँव में घर हुआ करते थे ख़ज़ाने वाले — Shakeel Azmi
अजीब मंज़र है बारिशों का मकान पानी में बह रहा है फ़लक ज़मीं की हुदूद में है निशान पानी में बह रहा है तमाम फ़सलें उजड़ चुकी हैं न हल बचा है न बैल बाक़ी किसान गिरवी रखा हुआ है लगान पानी में बह रहा है अज़ाब उतरा तो पाँव सब के ज़मीं की सतहों से आ लगे हैं हवा के घर में नहीं है कोई मचान पानी में बह रहा है कोई किसी को नहीं बचाता सब अपनी ख़ातिर ही तैरते हैं ये दिन क़यामत का दिन हो जैसे जहान पानी में बह रहा है उदास आँखों के बादलों ने दिलों के गर्द-ओ-ग़ुबार धोए यक़ीन पत्थर बना खड़ा है गुमान पानी में बह रहा — Shakeel Azmi
अकेले रहने की ख़ुद ही सज़ा क़ुबूल की है ये हम ने इश्क़ किया है या कोई भूल की है ख़याल आया है अब रास्ता बदल लेंगे अभी तलक तो बहुत ज़िंदगी फ़ुज़ूल की है ख़ुदा करे कि ये पौदा ज़मीं का हो जाए कि आरज़ू मिरे आँगन को एक फूल की है न जाने कौन सा लम्हा मिरे क़रार का है न जाने कौन सी साअ'त तिरे हुसूल की है न जाने कौन सा चेहरा मिरी किताब का है न जाने कौन सी सूरत तिरे नुज़ूल की है जिन्हें ख़याल हो आँखों का लौट जाएँ वो अब इस के बा'द हुकूमत सफ़र में धूल की है ये शोहरतें हमें यूँँही नहीं मिली हैं 'शकील' ग़ज़ल ने हम से भी बहुत वसूल की है — Shakeel Azmi