tum aasmaan pe jaana to chaand se kehna | तुम आसमान पे जाना तो चाँद से कहना

  - Shakeel Azmi

तुम आसमान पे जाना तो चाँद से कहना
जहाँ पे हम हैं वहाँ चांदनी बहुत कम है

  - Shakeel Azmi

Aasman Shayari

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    शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
    कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का
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    आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
    भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
    Waseem Barelvi
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    उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
    आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
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    हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया
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    कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
    कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता
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    वहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे हो

    दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी
    फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो
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    Nirmal Nadeem
    आसमाँ से गरज छेड़ती है हमें
    एक बारिश में भी भीगे थे साथ हम
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    तू शाही है परवाज़ है काम तेरा
    तिरे सामने आसमां और भी हैं
    Allama Iqbal
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    अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
    कुछ नहीं आसमान में रक्खा
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    हाथ रखकर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

    मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उसके क़दमों पर निसार
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    Nawaz Deobandi
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    मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल
    तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल

    तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन
    मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल

    अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर
    मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल

    तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह
    देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल

    मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा 'शकील'
    टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल
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    Shakeel Azmi
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    तुम ने स्वेटर बुना था मिरे नाम का
    मैं भी लाया था कुछ सर्दियाँ जंगली
    Shakeel Azmi
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    ये जो मैं होश में रहता नहीं तुमसे मिल कर
    ये मिरा इश्क़ है तुम इसको नशा मत समझो
    Shakeel Azmi
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    वो बुझ गया तो चला उसकी अहमियत का पता
    कि उस की आग से कितने चराग जलते थे
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    परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
    ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
    Shakeel Azmi
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