सभी से बात करते हैं कई लड़के
अदाएँ देख मरते हैं कई लड़के
कली को फूल बनते देखते हैं वो
कली को नोच धरते हैं कई लड़के
वफ़ा की ओढ़ कर चादर निकलते हैं
कहीं भी जा ठहरते हैं कई लड़के
वफ़ा के साथ करते हैं मुहब्बत को
मुहब्बत में सँवरते हैं कई लड़के
ज़माना मान बैठा है हमें दोषी
इसी चक्कर में डरते हैं कई लड़के
— Tiwari Jitendra















