ham parindon ko azaad karte rahe | हम परिंदों को आज़ाद करते रहे

  - Tiwari Jitendra

हम परिंदों को आज़ाद करते रहे
कुछ नए ज़ख़्म ईजाद करते रहे

वो मुयस्सर हमें तो नहीं है मगर
उसके बोसे को हम याद करते रहे

'उम्र भर बद दुआ ही मिली है मुझे
बेवफ़ा बन के बे-दाद करते रहे

दिल हमारा कहीं टूट जाएँ न फिर
दिल सँभालो ये फ़रियाद करते रहे

ख़ुदकुशी से उसे दुख हुआ ही नहीं
जान देने में इम्दाद करते रहे

वो किसी के कभी दिल से खेले नहीं
जो मिला उसको वो शाद करते रहे

यार मजनूँ नहीं और कोई नहीं
'जीत' बनने की फ़रियाद करते रहे

  - Tiwari Jitendra

Birthday Shayari

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