हम परिंदों को आज़ाद करते रहे
कुछ नए ज़ख़्म ईजाद करते रहे
वो मुयस्सर हमें तो नहीं है मगर
उसके बोसे को हम याद करते रहे
'उम्र भर बद दुआ ही मिली है मुझे
बेवफ़ा बन के बे-दाद करते रहे
दिल हमारा कहीं टूट जाएँ न फिर
दिल सँभालो ये फ़रियाद करते रहे
ख़ुदकुशी से उसे दुख हुआ ही नहीं
जान देने में इम्दाद करते रहे
वो किसी के कभी दिल से खेले नहीं
जो मिला उसको वो शाद करते रहे
यार मजनूँ नहीं और कोई नहीं
'जीत' बनने की फ़रियाद करते रहे
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Tiwari Jitendra
our suggestion based on Tiwari Jitendra
As you were reading Birthday Shayari Shayari