
लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले
माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
जो मुझ से भी ज़्यादा चाहे तुझ को ऐसा यार मिले
— Bhaskar Shukla
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