उजाले कभी भी हमारे नहीं हैं
जवानी के दिन इतने प्यारे नहीं हैं
जिन्होंने मुहब्बत बचाई हुई है
यहाँ उन के अपने सहारे नहीं हैं
अगर प्यास है फिर कहाँ देखते हैं
समुंदर कहीं इतने खारे नहीं हैं
अगर नेत्र खोले जलेगी ये दुनिया
स्वयं देव हैं वो फुहारे नहीं हैं
बचाते बचाते वफ़ा को जहाँ से
थके है मगर दोस्त हारे नहीं हैं
— Tiwari Jitendra















