मुहब्बत क्यूँ जताता ही नहीं है

किसी कूचे में जाता ही नहीं है

सफ़र तन्हा अकेला कट गया है
कोई उलफ़त निभाता ही नहीं है

ग़मों को और गहरा कर रहें हैं
कोई मरहम लगाता ही नहीं है

कहा करता था बस आवाज़ देना
बुलाने पे जो आता ही नहीं है

यहाँ मैं याद में मरता हूँ उस के
मेरा दिल क्यूँ भुलाता ही नहीं है

सितारे लूट बैठे चाँदनी को
कोई दीपक जलाता ही नहीं है

परिंदे प्यार करते हैं मुझी से
तिवारी दिल दुखाता ही नहीं है

— Tiwari Jitendra

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