Dushman Shayari - Poetic Verses Reflecting Rivalries and Resilience

Explore a bold collection of Dushman Shayari that beautifully captures the emotions of rivalries, challenges, and resilience. These poetic lines reflect strength, courage, and the art of overcoming adversaries in life.

Best Dushman Shayari on Rivalries and Strength

shatru shayari
दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे मे'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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उस ने इस तरह से बदला है रवय्या अपना
पूछना पड़ता है हर वक़्त, तुम्हीं हो ना दोस्त?
Inaam Azmi
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें
चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
Unknown
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आप बच्चों का दिल नहीं तोड़ें
भाई ये दुश्मनी हमारी है
Vishnu virat
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Heart Touching Dushman Shayari in Hindi

adu shayari
इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था 'शेफ़्ता'
ये क्या किया कि दोस्त को दुश्मन बना दिया
Mustafa Khan Shefta
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी
Ehsan Saqib
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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Emotional Dushman Shayari on Life and Challenges

dushman shayari
अब दोस्त कोई लाओ मुकाबिल में हमारे
दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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दश्त छोड़े हुए अब तो अरसा हुआ
मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ

मुझको औरत के दुख भी पता हैं कि मैं
एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ
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Rishabh Sharma
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मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता
Javed Akhtar
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कभी तो ख़त्म हो ये जंग जिसमें
फ़क़त मरने को जीना पड़ रहा है
Anand Verma
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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शायरी दूसरी हिमाक़त है
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Mehshar Afridi
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Short Dushman Shayari for Instagram Captions

उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
ऐ मेरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे
Ahmad Faraz
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आख़िरी जंग मैं लड़ने के लिए निकला हूँ
फिर रहे या न रहे तेरा दिवाना आना
Mubarak Siddiqi
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उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
Nida Fazli
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वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
मुझे वो जीत भी 'अम्बर' न होगी हार से कम
Ambreen Haseeb Ambar
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पहले ख़याल रख मिरा मेहमान कर मुझे
फिर अपनी कोई चाल से हैरान कर मुझे

हैं कौन आप, याद नहीं,कब मिले थे हम
इतना भी ख़ुश न होइए पहचान कर मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi

Poetic Dushman Shayari in Urdu

दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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जंग अपनों के बीच जारी है
सबके हाथों में इक कटारी है

छत हो दीवार हो कि दरवाज़ा
सबकी अपनी ही ज़िम्मेदारी है
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Santosh S Singh
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
Kashif Sayyed
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चार दिन झूठी बाहों के आराम से
मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी ठीक है

दोस्ती चाहे जितनी बुरी हो मगर
प्यार के नाम पर दुश्मनी ठीक है
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SHIV SAFAR

Dushman Shayari on Overcoming Adversaries

है दुआ जल्दी जन्नत अता हो तुझे
तू मेरे इश्क़ का इश्क़ है ऐ रक़ीब
Prit
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो
अपने हाथों से खिलाया था तुझे

तेरी गाली से मुझे याद आया
कितने तानों से बचाया था तुझे
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Ali Zaryoun
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ठहाका मार कर हथियार हँसते
नहीं जीतेंगे अब इंसान हमसे
Umesh Maurya
मुझसे जो मुस्कुरा के मिला हो गया उदास
ताज़ा हवा की खिड़कियों को जंग लग गई
Siddharth Saaz
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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Thoughtful Dushman Shayari on Courage and Resilience

मैं चाहता यही था सब चाह ख़त्म हो अब
फिर चाहकर तुम्हें बदला ये ख़याल मेरा
Abhay Aadiv
जीत ले दुनिया को बिन हथियार के
कृष्ण की बंसी में ऐसे राग हैं
Alankrat Srivastava
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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तेरी तारीफ़ करने लग गए हैं
तेरे दुश्मन हमारे शे'र सुनके
Tanoj Dadhich
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हो रही थी जंग उसके नाम पर और
वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया
Shashank Shekhar Pathak

Dushman Shayari on Power and Determination

कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
Ashu Mishra
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मुझ से नफ़रत है अगर उस को तो इज़हार करे
कब मैं कहता हूँ मुझे प्यार ही करता जाए
Iftikhar Naseem
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आँधियों से लड़ रहे हैं जंग कुछ काग़ज़ के लोग
हम पे लाज़िम है कि इन लोगों को फ़ौलादी कहें
Ameer Imam
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कभी कभी तो झगड़ने का जी भी चाहेगा
मगर ये जंग मोहब्बत से जीती जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
Arsh Malsiyani
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Funny Dushman Shayari for Lighthearted Rivalries

ये भी इक तरकीब है दुश्मन से लड़ने की
गले लगा लो जिस पर वार नहीं कर सकते
Shariq Kaifi
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मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ
Mirza Athar Zia
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल
हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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शराफ़त ने मुझको कहीं का न छोड़ा
रक़ीब अपने ख़त मुझसे लिखवा रहे हैं
Rajesh Reddy
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सारी दुनिया ने तो नफ़रत से पुकारा मुझको
माँ समझती है मगर आँख का तारा मुझको
Muneer shehryaar

Inspirational Dushman Shayari on Winning Battles

मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई
Sabahat Urooj
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तुमसे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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रक़ीब आकर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है
हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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ज़िन्दगी, यूँ भी गुज़ारी जा रही है
जैसे, कोई जंग हारी जा रही है

जिस जगह पहले से ज़ख़्मों के निशां थे
फिर वहीं पे चोट मारी जा रही है
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Azm Shakri
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कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई खानदानी दुश्मनी की बात है
Saahir
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