Mubarak Siddiqi

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@mubarak-siddiqi

Mubarak Siddiqi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mubarak Siddiqi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

आख़िरी जंग मैं लड़ने के लिए निकला हूँ फिर रहे या न रहे तेरा दिवाना आना — Mubarak Siddiqi

Ghazal

सुरमई शाम है मौसम है सुहाना आना इस से पहले कि मैं हो जाऊँ फ़साना आना मुझ से पहले ही कई लोग ख़फ़ा रहते हैं मुझ से जल जाए ज़रा और ज़माना आना इक तिरा हुस्न गुलाबों सा ग़ज़ल सूरत है इक ये सावन का महीना है सुहाना आना रोज़ कहते हो मुझे आज तो ये है वो है आज दुनिया से कोई कर के बहाना आना आख़िरी जंग मैं लड़ने के लिए निकला हूँ फिर रहे या न रहे तेरा दिवाना आना लोग कहते हैं तुझे भूल के भी ज़िंदा रहूँ मैं ने पूछा था मगर दिल नहीं माना आना लोग तो लोग हैं जो चाहे वो कह सकते हैं तू तो मेरा है मिरे दिल को दुखा न आना तू भी शमशीर-ए-बदन मस्त अदा तीर-ए-निगाह मैं भी बैठा हूँ कि हो जाऊँ निशाना आना दुश्मन-ए-जान समझता है कि तन्हा हूँ मैं मैं ने दुश्मन को बताना है कि ना ना आना मुस्कुराता हूँ मगर डर है किसी महफ़िल में अश्क आँखों से न हो जाएँ रवाना आना वो जो मा'सूम सा शाइ'र है 'मुबारक' 'अहमद' उस का दुनिया में फ़क़त तू है ख़ज़ाना आना — Mubarak Siddiqi