
तुम को फ़िराक-ए-यार ने मिस्मार कर दिया
मुझ को फ़िराक-ए-यार ने फ़नकार कर दिया
गुल से मुतालिबा जो किया बोसे का शजर
गुल ने हिला के पत्तियाँ इनकार कर दिया
— Shajar Abbas
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