अब मेरी बात न टाली जाए
कोई तस्वीर बना ली जाए
हैं बहुत ज़ख़्म मगर यादें हैं
जिस्म से जान निकाली जाए
हम तो भौंरे थे हमें मतलब था
फूल आए या तो माली जाए
पहले ही याद ने मारा मुझ को
अब कोई याद न पाली जाए
फ़ोन बजते ही उठा लेना है
कॉल कोई भी न ख़ाली जाए
जीत को सिर्फ़ मुहब्बत ही हो
होंठ से होंठ पे लाली जाए
— Tiwari Jitendra















