Amit Sharma Meet

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Amit Sharma Meet shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amit Sharma Meet's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से — Amit Sharma Meet
दिसंबर की सर्दी है उस के ही जैसी ज़रा सा जो छू ले बदन काँपता है — Amit Sharma Meet

Ghazal

दिल हमारा तो कहीं खोया नहीं था हाँ तुम्हारे पास बस ढूँढा नहीं था उस से केवल दोस्ती चाही थी हम ने इश्क़ कर बैठेंगे ये सोचा नहीं था उस की नर्माहट अभी तक है लबों पर वो महज़ इक आम सा बोसा नहीं था एक लड़की दिल लगाए तब से बैठी इश्क़ करना जब मुझे आता नहीं था अब कभी मिलना नहीं होगा हमारा ख़त में ऐसा तो कहीं लिखा नहीं था दर्द तन्हाई तड़प आँसू वग़ैरा यार तेरे इश्क़ में क्या क्या नहीं था आख़िरश दिल चल पड़ा उस की ही जानिब और कुछ इस के सिवा चारा नहीं था तुम यक़ीं मानो तुम्हारा ही असर है वर्ना ये पत्थर कभी धड़का नहीं था बिन तुम्हारे नाम हम लिखते भी कैसे सो ग़ज़ल में जान कर मक़्ता नहीं था — Amit Sharma Meet
दुनिया को जब नज़दीकी से देखा है तब समझा ये सब कुछ खेल-तमाशा है हाथों की दो-चार लकीरें पढ़ कर वो मुझ से बोला आगे सब कुछ अच्छा है उस से बस इक बार मिला पर हैराँ हूँ दिल में तब से घर कर के वो बैठा है काग़ज़ पर दिल की तस्वीर बनाई जब उस ने पूछा ये किस शय का नक़्शा है सोच रहा हूँ मैं इस का सौदा कर दूँ उस की यादों का जो दिल में मलबा है दोनों पहलू में ही हार छिपी इस में मेरे हाथों में अब ये जो सिक्का है इस ख़ातिर मैं रोज़ मशक़्क़त करता हूँ आसानी से क्या हासिल हो पाता है जब क़ुदरत ने थोड़ा आज नवाज़ा तो सारे मुझ से पूछे हैं तू कैसा है 'मीत' यहाँ अपने तो नाम के अपने हैं अन-जानों से रिश्ता दिल का गहरा है — Amit Sharma Meet
न खुली आँखों से दहशत का नज़ारा देखना जो हमारा है उसे औरों का होता देखना रू-ब-रू उस को नज़र भर देख भी सकते नहीं हाए कितना दुख भरा है ख़ुद को ऐसा देखना क्या अजब सा रोग बीनाई को मेरी लग गया हर किसी चेहरे में बस उस का ही चेहरा देखना इश्क़ में पथरा चुकी आँखों से है मुश्किल बहुत चाँद को ठहरे हुए पानी में चलता देखना हाए क्या मंज़र-कशी उभरी है इस तस्वीर में रोती आँखों से किसी प्यासे का दरिया देखना रात भर बेचैनियाँ सोने नहीं देतीं मुझे और दिन भर रात के होने का रस्ता देखना मौत हम से दो क़दम के फ़ासले पर है खड़ी अब बहुत दिलचस्प होगा ये तमाशा देखना — Amit Sharma Meet
अपनी आँखों को कभी ठीक से धोया ही नहीं सच कहूँ आज तलक खुल के मैं रोया ही नहीं मेरे लफ़्ज़ों से मिरा दर्द झलक जाता है जबकि इस दर्द को आवाज़ में बोया ही नहीं इक दफ़्'अ' नींद में ख़्वाबों का जनाज़ा देखा बा'द उस के मैं कभी चैन से सोया ही नहीं तंग गलियों में मोहब्बत की भटकते हैं सब मैं ने कोशिश तो कई बार की खोया ही नहीं साँस रुक जाए तड़पते हुए यादों में कहीं हिज्र का बोझ कभी दिल पे यूँँ ढोया ही नहीं मैं कहानी में नया मोड़ भी ला सकता था मैं ने किरदार को आँसू में भिगोया ही नहीं अपने रिश्ते का भी अब 'मीत' बिखरना तय था हम ने विश्वास के धागे में पिरोया ही नहीं — Amit Sharma Meet
तुझ को मा'लूम नहीं क्या है तिरी यादों से एक अंजान सा रिश्ता है तिरी यादों से रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से हिज्र के ग़म ने मुझे मार दिया था तो क्या मर के जीना भी तो सीखा है तिरी यादों से आज फिर से जो हुआ क़ैद तो ये सोचूँ हूँ कल ही सोचा था कि बचना है तिरी यादों से ऐसे शामिल था मैं तुझ में कि बड़ी मुश्किल से मैं ने अब ख़ुद को निकाला है तिरी यादों से क्या बताएँ कि यहाँ कैसे गुज़ारी हम ने अपनी हर साँस को सींचा है तिरी यादों से 'मीत' यादों ने भी कितना है सताया मुझ को मिरा तकिया बड़ा भीगा है तिरी यादों से — Amit Sharma Meet