ye lagta hai ab bhi kahii kuchh bacha hai | ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है

  - Amit Sharma Meet

ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है
तुम्हारा दिया ज़ख़्म अब तक हरा है

कहो कौन सी शक्ल देखोगे अब तुम
ये चेहरा तो इक आवरन से ढका है

लगा है ज़माना इबादत में जिस की
वो रहता कहाँ है तुम्हें कुछ पता है

गुनाहों से तौबा करो वक़्त रहते
वगर्ना तो दोज़ख़ का रस्ता खुला है

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
अमाँ यार छोड़ो ये हल्का नशा है

भलाई करो तो मिले है बुराई
ये क़िस्सा मिरी ज़िंदगी से जुड़ा है

ग़लत-फ़हमियाँ 'मीत' रक्खो न दिल में
वही सच नहीं जितना तुम ने सुना है

  - Amit Sharma Meet

DP Shayari

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