तन्हाइयों में हैं तेरी सोहबत के बादस
किस काम के बचेंगे मुहब्बत के बादस
तूने पलट के भी नहीं देखा मुहाजिरा
कोई नहीं है ख़ुश तेरी हिजरत के बादस
आमेज़िश-ए-करम है सितम तक में भी तेरे
मशहूर हो रहा हूँ मैं तोहमत के बादस
सूरज भी वक़्त-ए-हाजत-ए-इंसान कुछ नहीं
नज़रें नहीं ठहरती ज़रूरत के बादस
हम बन गए बिगड़ गए या मर गए तो क्या
क़िस्से तो जी उठे तेरी रुख़सत के बादस
कल तक यहाँ पे कोई हमें जानता न था
नज़रों में आ गए हैं बग़ावत के बादस
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