tanhaaiyon men hain teri sohbat ke baad se | तन्हाइयों में हैं तेरी सोहबत के बाद से

  - Shadab Javed

तन्हाइयों में हैं तेरी सोहबत के बाद से
किस काम के बचेंगे मुहब्बत के बाद से

तूने पलट के भी नहीं देखा मुहाजिरा
कोई नहीं है ख़ुश तेरी हिजरत के बाद से

आमेज़िश-ए-करम है सितम तक में भी तेरे
मशहूर हो रहा हूँ मैं तोहमत के बाद से

सूरज भी वक़्त-ए-हाजत-ए-इंसान कुछ नहीं
नज़रें नहीं ठहरती ज़रूरत के बाद से

हम बन गए बिगड़ गए या मर गए तो क्या
क़िस्से तो जी उठे तेरी रुख़सत के बाद से

कल तक यहाँ पे कोई हमें जानता न था
नज़रों में आ गए हैं बग़ावत के बाद से

  - Shadab Javed

Hijr Shayari

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