faayda hi nahin ladai men | फ़ाएदा ही नहीं लड़ाई में

  - Shadab Javed

फ़ाएदा ही नहीं लड़ाई में
फ़ाएदा ढूँढ पारसाई में

दिल में ऐसे किसी की याद आई
जैसे पत्थर गिरा हो खाई में

आज फिर साथ-साथ सोएँगे
आपके ग़म मेरी रजाई में

मैं तेरा हो सका न जीते जी
लाश ले लेना मुँह-दिखाई में

ऐसा रोया लिपट के मैं ख़ुद से
जान तक बह गई जुदाई में

था मुहब्बत का इक पुराना महल
मैं मिला हूँ उसी ख़ुदाई में

जान दिल होश मैं मेरा सब कुछ
हार आया हूँ अँख-लड़ाई में

फिर से कुछ शे'र हो गए तुझ पर
आज लफ़्ज़ों से हाथा-पाई में

मुझको 'शादाब' ग़म है बस इसका
वो भी शामिल है जग-हँसाई में

  - Shadab Javed

Udasi Shayari

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