kisi kii aankhoñ ke dar khulenge to dar khulenge | किसी की आँखों के डर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

  - Shadab Javed

किसी की आँखों के डर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
ये ख़्वाब तुम पर अगर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

किसी को ऐसे कोई ज़करिया नहीं मिलेगा
जो बीच से कुछ शजर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

यहाँ कमानों को तान लेना कमाल कब है
तुम्हारे तीरों के पर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

दुआ-ए-आदम जो याद आई तो याद आया
दुआओं में जब असर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

पुराने बीहड़ से रास्तों पर क़दम बढ़ाओ
क़दम बढ़ेंगे जिगर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

सवाल करने का ढंग 'शादाब' आ गया है
तो दर खुलेंगे तो दर खुलेंगे तो दर खुलेंगे

  - Shadab Javed

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