किसी की आँखों के डर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
ये ख़्वाब तुम पर अगर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
किसी को ऐसे कोई ज़करिया नहीं मिलेगा
जो बीच से कुछ शजर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
यहाँ कमानों को तान लेना कमाल कब है
तुम्हारे तीरों के पर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
दुआ-ए-आदम जो याद आई तो याद आया
दुआओं में जब असर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
पुराने बीहड़ से रास्तों पर क़दम बढ़ाओ
क़दम बढ़ेंगे जिगर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
सवाल करने का ढंग 'शादाब' आ गया है
तो दर खुलेंगे तो दर खुलेंगे तो दर खुलेंगे
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