Bahan Shayari - Poetic Verses Celebrating Sisters and Bonds

Explore a heartfelt collection of Bahan Shayari that beautifully captures the love, care, and bond between siblings. These poetic lines reflect the emotions tied to bahan (sister) and the special connection shared in a sibling relationship.

Best Bahan Shayari on Sisterhood and Love

bahano shayari
ज़िंदगी तुझ से भी क्या ख़ूब तअल्लुक़ है मिरा
जैसे सूखे हुए पत्ते से हवा का रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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जो बच गए हैं चराग़ उनको बचाये रक्खो
मै चाहता हूँ हवा से रिश्ता बनाये रक्खो
Azm Shakri
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मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
Akhtar Nazmi
इश्क़ इसको कहूँ या कहूँ मसअला
मुख़्तलिफ़ तेरा मेरा ये रिश्ता रहा
Juun Sahab
माँ-बाप, बहन-भाई, सब दोस्त, मुहब्बत तुम
सपनों के लिए रिश्ते कुर्बान नहीं करना
Prashant Sitapuri
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Heart Touching Bahan Shayari in Hindi

bahan shayari
हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं
हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है
Kanval Ziai
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निभाया जिससे भी रिश्ता तो फिर हद में रहे हैं हम
किसी के मखमली तकिये के ऊपर सर नहीं रक्खा
Nirbhay Nishchhal
सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में
कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता
Munawwar Rana
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मना लो यार मेरी जान तुम हर बार ये राखी
तेरा भाई है मेरा यार क्या इनकार ये राखी
Nirbhay Nishchhal
अपनी रज़ा अपनी सहूलत के लिए
रिश्ता रखा था बस ज़रुरत के लिए

बिखरे हुए दिल दे उसे ये बद्दुआ
वो उम्र भर तरसे मुहब्बत के लिए
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RDX

Emotional Bahan Shayari on Sisterly Bond

sister shayari
प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी
यानी उनसे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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खाक हो जायेंगे हम खाक में मिल कर तेरी
तुझसे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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उसने हँसते हुए तोड़ा था हमारा रिश्ता
हम सभी को ये बताते हुए रो देते हैं
Zubair Alam
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बचाता कब तलक मैं एक रिश्ता
तुम्हें पाता तो घर कैसे बचाता
anupam shah
परिंदों से था इक रिश्ता हमारा
दरख़्तों को जलाकर सच छुपाया
Meem Alif Shaz

Beautiful Bahan Shayari in Urdu

नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम ?
बिछड़ना है तो झगडा क्यूँ करें हम?
Jaun Elia
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम
एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
Aks samastipuri
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रिश्ता अदबी रखते थे यार उसी के दिल से हम
अब हर ग़लती अपने ही हाथ मिटाने आए हैं
Raunak Karn
दो चार दिन में ही अगर कपड़े उतर गए
रिश्ता कोई भी हो मग़र ये प्यार तो नहीं
Umesh Maurya

Short Bahan Shayari for Instagram Captions

मेरे दर्द की वो दवा है मगर
मेरा उससे कोई भी रिश्ता नहीं

मुसलसल मिलाता है मुझसे नज़र
मैं कैसे कहूँ वो फ़रिश्ता नहीं
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S M Afzal Imam
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कितनी मुश्किल के बाद टूटा है
एक रिश्ता कभी जो था ही नहीं
Shahbaz Rizvi
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इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ
बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं
Ajmal Siddiqui
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सही में अब हमें शायद किसी शमशान जाना था
सही में अब हमारा दर्द से रिश्ता पुराना था

हमें तो आपसे बस बात करने की रही कोशिश
अरे ये स्कूल की कॉपी किताबें सब बहाना था
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Raunak Karn
किये थे पाप जितने भी बुरे सदक़ा उतारा था
हज़ारों मुश्किलों की जद में रिश्ता हमारा था

गिरे थे भाव सोंनें और चाँदी के मिनट भर में
उसनें जब भरी बाज़ार में झुमका उतारा था
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Subrat Tripathi

Poetic Bahan Shayari on Love and Protection

मैं शाइर उसको चूड़ी ही दे सकता था बस
रिश्ता सोने के कंगन देने पर होता है
Neeraj Neer
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है

बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है
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Tehzeeb Hafi
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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उदासी से मेरा रिश्ता तो कुछ ऐसा है अब ख़ालिद
जो मैं ग़मगीन होता हूं उदासी उस पे छाती है
Khalid Azad
नहीं बुझती है प्यास मन की
भई भूख जब तक हो तन की
Sahil Verma

Bahan Shayari on Growing Together and Support

दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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तोहफ़े में भेजा है भाई ख़ुदा ने आपको
है दुआ मेरी कि ये रिश्ता यूँ ही चलता रहे
Shubham Burmen
रिंदों को मयख़ाने से घर ले जाने वाले
फिर तेरा भी उन मयख़ानों से क्या रिश्ता है

मयख़ाने के रस्ते में जो भी उनको  दिखता
इन दुनिया वालों को वो ग़ाफ़िल ही लगता है
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Hrishita Singh
क्यूँ मानूँ मैं बात तुम्हारी
तुमसे मेरा रिश्ता क्या है
Ambar

Thoughtful Bahan Shayari on Family and Affection

जीत भी लूं गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा
हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा

कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता
तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
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Ankit Maurya
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क्या जाने किस ख़ता की सज़ा दी गई हमें
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया

शादी में सब पसंद का लाया गया मगर
अपनी पसंद का उसे दूल्हा नहीं मिला
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Afzal Ali Afzal
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प्यार क्या है ये हमको नहीं थी ख़बर
एक अंजान रिश्ता निभाने लगे
Manish Yadav
दर्द के दरिया से इक रिश्ता निभाना रह गया
मेरे बस में ख़ामुशी का क़हर ढाना रह गया
Rohit tewatia 'Ishq'
जा रहे हो तुम कहाँ ऐ जान मुझको छोड़ कर
तुम बहुत ख़ुश हो रक़ीबों से यूँ रिश्ता जोड़ कर
Shayar Danish

Inspirational Bahan Shayari on Strength and Compassion

ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझसे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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ग़ैर से नाता जोड़ सकोगे सच में क्या
मुझसे रिश्ता तोड़ सकोगे सच में क्या

तुमसे पहले जो भी मेरी दुनिया थी
तुम वो दुनिया मोड़ सकोगे सच में क्या
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Ambar
अजब सा एक रिश्ता चाँद का अम्बर के तारों से
कि बाग़ों का मिलन हो जैसे सावन में बहारों से

जहाँ में हाँ ज़ुबाँ कोई मुहब्बत की नहीं होती
बयाँ जज़्बात हो जाते हैं आँखों के इशारों से
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Shivang Tiwari
इक आख़िरी रस्म निभा लो कि अब ये रिश्ता तोड़ देते हैं
तुम तो जा ही चुकी हो हम भी अब तुमसे मुँह मोड़ लेते हैं

थी झूठी सब क़समें, थे झूठे सब वादे, और वो तुम्हारे फ़रेबी इरादे
उम्मीद-ए-वफ़ा तुमसे नहीं, वफ़ा का ज़िम्मा भी ख़ुद ही पे छोड़ देते हैं
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Shashank Tripathi

Bahan Shayari on Life and Sibling Memories

अब मज़ीद उससे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिससे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्मे नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
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Tehzeeb Hafi
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अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा
Jaun Elia
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बहुत दिनों से था इक रिश्ता
मैं तोड़ कर उसे आया हूँ

चराग़ देने वालो समझो
मैं चाँद छोड़ के आया हूं
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Ganesh gorakhpuri
काश अपने दरमियाँ इक यार होता
अपना ये रिश्ता न हद से पार होता
Govind kumar
खु़दा से रिश्ता क़रीब से है
‌ख़फ़ा ये दिल तो नसीब से है

समझ रहे थे जिसे मोहब्बत
उसे मोहब्बत रक़ीब से है
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Shailendra gupta