apne hisse ki ana doon to ana doon kis ko | अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को

  - Amit Sharma Meet

अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को
अपनी नज़रों से गिरा दूँ तो गिरा दूँ किस को

ज़िंदगी का ये मिरी कौन है क़ातिल जाने
मैं हूँ मुश्किल में सज़ा दूँ तो सज़ा दूँ किस को

दोस्ती में भी है रंजिश की कहानी कि मिरी
इस कहानी को बता दूँ तो बता दूँ किस को

मुद्दतों से हैं मिली ठोकरें मुझ को जो यहाँ इश्क़-बाज़ी में वफ़ा दूँ तो वफ़ा दूँ किस को

वार सब पीठ पे करते हैं यूँँ दिल में रह कर
तू बता दे मैं दुआ दूँ तो दुआ दूँ किस को

बात करती ही नहीं अब तो ये तन्हाई भी
मन की हर बात सुना दूँ तो सुना दूँ किस को

हर कोई जूझ रहा है यहाँ अपने ग़म से
दर्द-ए-ग़म की ये दवा दूँ तो दवा दूँ किस को

कौन लाएगा मिरी चिट्ठियाँ ख़ुशियों वाली
अपने घर का मैं पता दूँ तो पता दूँ किस को

ग़म में डूबा हुआ रहता हूँ मैं अब हर लम्हा
'मीत' ये जाम पिला दूँ तो पिला दूँ किस को

  - Amit Sharma Meet

Qaid Shayari

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