Vikram Sharma

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@vikram-sharma

Vikram Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vikram Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

उदासी जैसे कि उस के बदन का हिस्सा है अधूरा लगता है वो शख़्स अगर उदास न हो — Vikram Sharma
फिर से मिलने आ गईं तन्हाइयाँ क्यूँँ नहीं खुलते हैं दफ़्तर रात में — Vikram Sharma
किस काम के वो फूल जो सबने दिए मुझे बेहतर है तेरे हाथ का ख़ंजर लगे मुझे — Vikram Sharma
मिरे किरदार जाने दे नज़रअंदाज कर दे ख़ुदा की फ़िल्म है ये आदमी से क्या शिकायत — Vikram Sharma

Ghazal

सोचता हूँ कि दिल-ए-ज़ार का मतलब क्या है एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए आप की नज़रों में दीवार का मतलब क्या है आख़िरी फ़ैसला तुम अपने मुताबिक़ लोगे फिर मेरी हामी या इनकार का मतलब क्या है संग-दिल लोगों से क्या अपनी तबीअ'त कहते किसी दीवार से गुफ़्तार का मतलब क्या है उठ के जा सकते हैं हम ऐसों के साए से आप हम समझते हैं कि अश्जार का मतलब क्या है पहले पहले तो फ़क़त ज़ब्त के इम्कान रहे रफ़्ता रफ़्ता खुला इज़हार का मतलब क्या है मैं कि चुप ज़ात था सो शे'र कहा करता था पूछ लेती थी वो अश'आर का मतलब क्या है — Vikram Sharma
आम मौक़ों पे न आँखों में उभारे आँसू हिज्र जिस से भी हो पर तुझ पे ही वारे आँसू ज़ब्त का है जो हुनर मैं ने दिया है तुम को मेरी आँखों से निकलते हैं तुम्हारे आँसू क्यूँ न अब हिज्र को मैं इब्तिदा-ए- वस्ल कहूँ आँख से मैं ने क़बा जैसे उतारे आँसू दूसरे इश्क़ की सूरत नहीं देखी जाती धुंधले कर देते हैं आँखों के नज़ारे आँसू आँख की झील सुखाती है तिरी याद की धूप मरने लगते हैं वहाँ प्यास के मारे आँसू बिन तेरे आँखों को सहरा न बना बैठूँ मैं रोते रोते न गँवा दूँ कहीं सारे आँसू मुझ फ़रेबी को जो तू ने ये मोहब्बत दी है आँख से गिरते हैं अब शर्म के मारे आँसू रात होती है तो उठती हैं ज़ियादा लहरें और आ जाते हैं पलकों के किनारे आँसू — Vikram Sharma