दश्त में यार को पुकारा जाएक़ैस साहब का रूप धारा जाएमुझ को डर है कि पिंजरा खुलने परये परिंदा कहीं न मारा जाएदिल उसे याद कर सदा मत देकौन आता है जब पुकारा जाएदिल की तस्वीर अब मुकम्मल होउन की जानिब से तीर मारा जाए— Vikram Sharma