ये कैसे सानिहे अब पेश आने लग गए हैंतेरे आग़ोश में हम छटपटाने लग गए हैंबहुत मुमकिन है कोई तीर हम को आ लगेगाहम ऐसे लोग जो पंछी उड़ाने लग गए हैं— Vikram Sharma