
तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो
मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो
— Vikram Sharma
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