मैं तुझ सेे बात करने को तिरे किरदार में आ करइधर से फ़ोन करता हूँ उधर से बात करता हूँमैं तेरे साथ तो घर में बड़ा ख़ामोश रहता थानहीं मौजूद तू घर में तो घर से बात करता हूँख़िज़ाँ का कोई मंज़र मेरे अंदर रक़्स करता हैकभी जो बन में गुल से या समर से बात करता हूँ— Vikram Sharma