Meaning of

ख़िज़ाँ

khizaan • خزاں

पतझड़; अवनति

autumn; decline

خزاں; زوال

Persian

बन कर कभी बहार तो बन कर कभी ख़िज़ाँ आबाद कर गए कभी बर्बाद कर गए — Ramnath Shodharthi
हसीन आँखों से इतने हसीन ख़्वाब न देख ख़िज़ाँ की रुत में शजर पर नए गुलाब न देख — Shajar Abbas
मेरी बुलबुल यहीं मौजूद रहना ख़िज़ाँ को दूर ले कर जा रहा हूँ — Sohil Barelvi
वो मुझ सेे रूठ जाती है तो दिल मेरा ये कहता है ख़िज़ाँ के बा'द आएँगी बहारें लौट कर इक दिन — Shivam Rathore
बर्ग-ए-ख़िज़ाँ हो ही रही रुत आने जाने के लिए शाख़-ए-निहाल-ए-ग़म हरी होगी ज़माने के लिए — Manohar Shimpi

'ख़िज़ाँ' गिरते पत्तों और प्रकृति के कोमल क्षय की छवि जगाता है। कविता में, यह समय के प्रवाह, परिवर्तन की अनिवार्यता, और अंत में पाई जाने वाली सुंदरता का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'ख़िज़ाँ' का उपयोग जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति पर विचार करने के लिए करते हैं। यह एक प्रकार की पुरानी यादों, विदाई की मधुर कड़वाहट, और जीवन के चक्रों की शांत स्वीकृति को व्यक्त कर सकता है।

'ख़िज़ाँ' अंत और आरंभ की फुसफुसाहट है, जीवन के शाश्वत नृत्य की कोमल याद दिलाता है।