मौसम प' मिरा कोई इख़्तियार नहीं हैअब की ख़िज़ाँ के बा'द में बहार नहीं हैवा'दा लबों पे है जो निगाहों में नहीं हैबोसा तो दे दिया यूँ मगर प्यार नहीं है— anupam shah