निढाल था निढाल को यूँँ और निढाल कर दिया
बिछड़ते वक़्त उसने मिलने का सवाल कर दिया
तिरी गली से जाऊँगा तो तेरी याद आएगी
इसी ख़याल ने मिरा गुज़र मुहाल कर दिया
बड़ा कमाल है ये अपनी सल्तनत को छोड़ना
है फ़ख़्र का मक़ाम आपने कमाल कर दिया
हमारे हाल-ए-दिल पे आँखें ख़ूँ के अश्क रोई हैं
हमारे दिल का 'इश्क़ तूने कैसा हाल कर दिया
यक़ीन कर हसीं बशर जो कह रहा हूँ सब है सच
हाँ हुस्न ने तिरे तुझे ही बेमिसाल कर दिया
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