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Bimar Shayari

Here is a curated collection of Bimar shayari in Hindi. You can download HD images of all the Bimar shayari on this page. These Bimar Shayari images can also be used as Instagram posts and whatsapp statuses. Start reading now and enjoy.

आलम-ए-वहशत में की है गुफ़्तगू दीवार से
क़त्ले ख़ामोशी किया है ख़ंज़रो तलवार से

यूँ नहीं बस देखने में लगते हैं बेदार से
रतजगे कितने किए हैं पूछिए बीमार से

दिन गुज़ारा कैसे हमने रात कैसे काटी है
जानना गर हो तो पूछो इस दिले बेज़ार से

मुफ़लिसी की आग में माना झुलस कर मर गये
भीख में मांगी न दौलत पर किसी ज़रदार से

क्यूँ समन्दर पीने बैठे पूछिए हमसे नहीं
इन्तहां-ए-तिश्नगी बस देखिए अब्सार से

काम लेते ही रहे हैं मुझसे मेरे दोस्त सब
आप भी ले लीजिए कुछ काम मुझ बेगार से

ख़ाक वो गुलशन हुआ जिसमे हसीं गुल खिलते थे
अब तो ज़ीनत है चमन की चार सू बस ख़ार से

लाख तस्वीरें बनाओ ख़ूब रंगो बू भरो
कम हरिक तस्वीर होगी उसके बिन शहकार से

लोग सारे शहर के हमदर्द मेरे बन गए
पूछिए मत क्या मिला इस ग़म के कारोबार से

बात दिल की दिल में ही मुझको दबाकर रखनी थी
कहके तुझसे गिर गया मैं ख़ुद के ही मेयार से

डूबने वाले "अमन" उस पार चिल्लाते रहे
देखते सब रह गए बस दरिया के इस पार से
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Aman Kumar Shaw "Haif"
मांझी अगरचे याद है तो जानिए के दिन गए
जब आज मुस्तक़बिल लगे तो पूछिए के दिन गए?

सबसे मिले मिलते रहे, सबने कहा हम यार हैं
तुमने कहा उस्ताद है, तब हाशिए के दिन गए

जो शायरी के नाम पर चीखा किए सारी उमर
वो जा चुके हैं, आप धीरे बोलिए, के दिन गए

तुमको जुनूँ के नाम पर लाया गया है जंग में
तुम को सुकूँ दरकार है तो रोईए के दिन गए

ये छह पहर का काम है कुछ दो पहर आराम है
ये इश्क़ सबसे न हो सका सब रो दिए के दिन गए

अब जाहिलों से इश्क़ की, कर ली ख़ता तो ये करें
अब सर धुनें, अब रोइये, सर फोड़िए, के दिन गए

जब नौकरी तक आ चुके, कितना बुरा सौदा किया
अब जी बजाते आइए, ये बोलिए के दिन गए

तुमने किये जो इश्क में वादे सभी पूरे किये
अब राब्ता बेकार है ये जानिए के दिन गए

पहले पहल लगता था ये के काफ़िया क्या ख़ूब है
जब ख़ुद ग़ज़ल हम हो गए हर काफ़िये के दिन गए

हम आपके बीमार थे हर बात पर तैयार थे
कुछ था वहम भी इश्क़ का, अब छोड़िए के दिन गए

इतना जुनूँ था जिस्म में दुनिया जला सकते थे हम
सब कुछ ख़ुदा का शुक्र है, और किसलिए के दिन गए

गर इश्क़ तुमको लग रहा था क़ैद फिर तो जाइये
अब छत गई सर से सनम पर खोलिए के दिन गए

हम आफ़तों में मुब्तला काफ़िर भी हम, हम ही ख़ुदा
करने को बाक़ी है बहुत, मत सोचिए के दिन गए
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Gagan Bajad 'Aafat'
ज़रा इज़हार की कीमत ज़रा इसरार की कीमत
चुकाए जा रहे हैं हम दिल-ए-बीमार की कीमत

तुझी को जीत जाने में ख़ुदी को हार बैठे हैं
हमारी जीत ही तो है हमारी हार की कीमत

निभाने को हुए राज़ी मुहब्बत तेरी शर्तों पर
मगर अब जान ले लेगी तुम्हारे प्यार की कीमत

कहानी से चले जाना मुझे लगता मुनासिब है
फ़साना मार डालेगी मेरे किरदार की कीमत

अना से अर्ज़ करते हो ज़हन को मर्ज़ करते हो
चुकाए जाओगे कब तक यही बेकार की कीमत

खिलौने बेचने बस्ता भुलाकर रोज़ आता है
उसी बच्चे से समझेंगे भरे बाज़ार की कीमत

उसे ख़ुश रख लिया है पर ख़ुदी को भूल आये हैं
चुकाई यूँ गयी कश्ती से ही पतवार की कीमत

कभी इंसान कोई ख़ुद से तो जुड़ भी न पाएगा
हमेशा आड़े आएगी किसी अवतार की कीमत

तेरी बाहों की रानाई से हम उकता भी सकते हैं
चुका ना पाओगे तुम रोज़ की तकरार की कीमत

किसी बीमार के इज़हार को आज़ार मत करना
कचहरी और सदमे है ग़लत दिलदार की कीमत

सुनो तुम कुछ सलीके से समय पर दाद भी दे दो
हमें इतनी सी है दरकार इन अश'आर की कीमत
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Gagan Bajad 'Aafat'

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