Bimar Shayari - Poetic Verses Reflecting Illness and Pain

Explore a heartfelt collection of Bimar Shayari that beautifully captures the emotional and physical struggles of illness. These poetic lines reflect the pain, vulnerability, and hope during moments of being bimar (sick).

Best Bimar Shayari on Illness and Struggles

beemaari shayari
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़
Meer Taqi Meer
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जानती हो कि क्या हुआ है तुम्हें
इश्क़ का रोग लग गया है तुम्हें

तुमको देखें तो देखते जाएँ
देखने का अलग मज़ा है तुम्हें
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Pravin Rai
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पूरी कायनात में एक कातिल बीमारी की हवा हो गई
वक्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गयीं
Unknown
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उस को झूठे वादें करने की बीमारी है
ऐसा लगता है उस की आदत सरकारी है
Meem Alif Shaz
हुआ नहीं है कुछ ये तो ख़ुमारी है
मुझे तो सिर्फ़ ‘जॉन’ की बिमारी है
Sanjay Vyas

Heart Touching Bimar Shayari in Hindi

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
Mirza Ghalib
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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
Mirza Ghalib
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
एक मुद्दत से दिल-ए-बीमार हूंँ मैं
मर्ज़ काफ़ी है मुझे बीमार हूंँ मैं
Sagar Sahab Badayuni
बिछड़कर कब रहा तुझसे ठिकाना इक तबियत का
मुझे फिर याद आया कल फ़साना इक तबियत का

बड़े दिन बाद इक तो मौका था मिलने का तुमसे और
वो भी तुमने बना डाला बहाना इक तबियत का
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karan singh rajput

Emotional Bimar Shayari on Pain and Weakness

भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
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अब इक बीमार लाओ तो बचें हम
मसीहाई है बीमारी हमारी
Swapnil Tiwari
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
किसी को हो कोई भी मर्ज़ सब को कहता फिरता हूँ
श़िफा का राज़ तेरे नाम की दवा ज़रूरी है
Harsh Raj
किसी का गर सुकूँ हो तो किसी का मसअला हो तुम
दवा हो तुम, दुआ हो तुम, मरज़ हो तुम, बला हो तुम
Shashank Shekhar Pathak

Beautiful Bimar Shayari in Urdu

तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना
वो सोचता है बहुत और बोलता कम है
Nawaz Deobandi
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
Meer Taqi Meer
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मुझे भी लग गई बीमारी आख़िर इश्क़ की दोस्त
मिरे दिल पर भी कब्ज़ा कर लिया आख़िर किसी ने
ABhishek Parashar
मुसाफ़िरत जब शुरू करेंगे तो पहले सू-ए-हरम चलेंगे
हम अपने दस्त-ए-अदब में लेकर वफ़ा-ओ-हक़ का अलम चलेंगे

सदा सदा को बुलन्द अपनी करेंगे मज़लूमियत के हक़ में
सदा मज़म्मत करेंगे ज़ुल्मत की राह-ए-हक़ पर क़दम चलेंगे
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Shajar Abbas
मरज़ कौन से पाल कर के रखे
नज़र ही नज़र की दवा तो नहीं
Meenakshi Kumawat Meera

Short Bimar Shayari for Instagram Captions

चारागरी की बात किसी और से करो
अब हो गए हैं यारो पुराने मरीज़ हम
Shuja Khavvar
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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से
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Tehzeeb Hafi
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मरीज़-ए-इश्क़ हूँ दीदार-ए-यार काफ़ी है
मिलेगा दीद से जो भी क़रार काफ़ी है
Nityanand Vajpayee
न हम आबाद कहते हैं, न हम बरबाद कहते हैं
उसे जो कि मरीज़-ए-इश्क़ है, फरहाद कहते हैं
Sumit Panchal
आलम में करते हो नुमाइश इस क़दर रंज-ओ-अलम की
ये लब नहीं खुलते जो ग़म ना-क़ाबिल-ए-बरदाश्त होता
Prakash Pandey

Poetic Bimar Shayari on Health and Recovery

बैठे बिठाए हम को सनम याद आ गए
फिर उन के साथ उन के करम याद आ गए

कोई जो राह चलते अचानक मिला मियाँ
हम को हर एक रंज-ओ-अलम याद आ गए
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shaan manral
हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे
अब इंतज़ार आपका कोई करे! करे!

मैंने तो यूँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी
तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!
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Balmohan Pandey
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हमसे पूछा गया बतलाओ मोहब्बत क्या है
हमने झुँझला के कहा रोग है जीवन भर का
Shajar Abbas
रूह का जैसे मिलन होता ख़ुदा से है यहाँ
वैसे बीमारी दुआ से ठीक होती हैं सभी
Lalit Mohan Joshi
माना तुम्हारा घर ही तुम्हारा मदार है
बाहर निकल के देख अलम बेशुमार है
Javed Aslam

Bimar Shayari on Suffering and Endurance

गर अदीबों को अना का रोग लग जाये तो फिर
गुल मोहब्बत के अदब की शाख़ पर खिलते नहीं
Afzal Ali Afzal
ये मुझे नींद में चलने की जो बीमारी है
मुझ को इक ख़्वाब-सरा अपनी तरफ़ खींचती है
Shahid Zaki
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नब्ज़ देखो न अब तबीब मेरी
इश्क़ के रोग की दवा ही नहीं
Shakir Sheikh
मर्ज़ कैसे पता लग सके
जाँ मु'आलिज न हूँ मैं अभी
Akash Panwar
तुम को भी मेरा रोग न लग जाए चारागर
तो मुझ को मेरे हाल पे ही छोड़ दीजिए
shaan manral

Thoughtful Bimar Shayari on Strength and Resilience

हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ
आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दख़्ल दे कोई
Jaun Elia
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इस मरज़ से कोई बचा भी है
चारागर इश्क़ की दवा भी है
Unknown
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दाँव पर जान हकीमों की भी लगी है मगर
वो शिफ़ा दे रहे हैं सबको अस्पतालों में
Vishwadeep shukla
मिटी जा रही है ये दुनिया मुसलसल ये ऐसी वबा है
दवा-साज़ तू क्यों बनाता नहीं है दवा-ए-उदासी
Kiran K
प्यार का जाम तुझे ऐसा पिलाना है मुझे
माज़ी के मर्ज़ की यादों को भुलाना है मुझे
Adarsh Anand Amola

Inspirational Bimar Shayari on Healing and Hope

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए
Rahat Indori
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वो जिसकी याद ने जीना मुहाल कर रखा है
उसी की आस ने मुझको सँभाल कर रखा है

सियाह रातों में साए से बातें करता है
तुम्हारे ग़म ने नया रोग पाल कर रखा है
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Harsh saxena
मुझ से ख़फ़ा है तो होने दो
ये दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
शेर पहले तो गुज़रते हैं अलम से
बाद उस के कुछ हुआ मेरी क़लम से
Jugnuu Zulfiqaar
चाहता था कुछ कहूँ, पर यार ने
कुछ पूछा ही ना तबियत के सिवा
karan singh rajput

Bimar Shayari on Love and Support during Illness

कभी हँसता हूँ तो आँखे कभी मैं नम भी रखता हूँ
हर इक मुस्कान के पीछे हज़ारों ग़म भी रखता हूँ

शिफ़ा भी दे नहीं सकता मुझे कोई मेरा अपना
नतीजन मैं मिरे ज़ख्मों का ख़ुद मरहम भी रखता हूँ
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Shubham Dwivedi
कुछ तबीयत में उदासी भी हुआ करती है
हर कोई इश्क़ का मारा हो, ज़रूरी तो नहीं
Jaani Lakhnavi
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मैं ही आशिक़ होता तो मुझको ही पागल कहते सब
लेकिन उसकी चाहत की सबको बीमारी लगती है
Ravi 'VEER'
मर्ज़ ऐसा था परिंदे का कि मरना तय ही था
पर शजर की गोद में आया तो अच्छा हो गया
Ashish Awasthi
कभी मिलो तो बताएँ तुम्हे कि क्या है मुझे,
जिसे समझते हो जन्नत वही सज़ा है मुझे

मैं हर किसी को तेरे नाम से बुलाता हूँ,
बिछड़ के तुझसे अजब रोग लग गया है मुझे
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Aatish Alok