bharat ke upkaar ko maan rahe sab log | भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग

  - Divy Kamaldhwaj

भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'

  - Divy Kamaldhwaj

Aadmi Shayari

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    आप की सादा-दिली से तंग आ जाता हूँ मैं
    मेरे दिल में रह चुके हैं इस क़दर हुश्यार लोग
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    अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
    तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फ़ुज़ूल-ख़र्ची नहीं करेंगे
    Rehman Faris
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    सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
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    अलमास धरे रह जाते हैं बिकता है तो पत्थर बिकता है
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    Khalid Sajjad
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    हम तो सुनते थे कि मिल जाते हैं बिछड़े हुए लोग
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    Divy Kamaldhwaj
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    फ़क़त क़िरदार में ढलना था हमको
    फ़क़त क़िरदार बन कर रह गए हैं
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