Balmohan Pandey

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@balmohan-pandey

Balmohan Pandey shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Balmohan Pandey's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

वो मेरी दुनिया का हिस्सा थी मेरी दुनिया नहीं इक शजर कटने से वन वीरान हो जाएगा क्या — Balmohan Pandey
जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए — Balmohan Pandey
हाए वो इश्क़ छुपाने के ज़माने 'मोहन' याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना — Balmohan Pandey
तुम्हें पता है जिन्हें तुम ख़ुदा समझते हो तुम्हारे सोचने और बोलने से डरते हैं — Balmohan Pandey
दफ़्तर में तय किया था कि तारे गिनेंगे आज लेकिन हमें पहुँचते ही घर नींद आ गई — Balmohan Pandey
फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ — Balmohan Pandey
एक मुझे ख़्वाब देखने के सिवा चाय पीने की गंदी आदत है — Balmohan Pandey

Ghazal

इस से पहले कि कोई और हटा दे मुझ को अपने पहलू से कहीं दूर बिठा दे मुझ को मैं सुख़न-फ़हम किसी वस्ल का मुहताज नहीं चाँदनी रात है इक शे'र सुना दे मुझ को ख़ुद-कुशी करने के मौसम नहीं आते हर रोज़ ज़िंदगी अब कोई रस्ता न दिखा दे मुझ को एक ये ज़ख़्म ही काफ़ी है मिरे जीने को चारा-गर ठीक न होने की दवा दे मुझ को यूँँ तो सूरज हूँ मगर फ़िक्र लगी रहती है वो चराग़ों के भरम में न बुझा दे मुझ को तुझ को मा'लूम नहीं इश्क़ किसे कहते हैं अपने सीने पे नहीं दिल में जगह दे मुझ को हर नए शख़्स पे खुल जाने की आदत 'मोहन' देने वाले से कहो थोड़ी अना दे मुझ को — Balmohan Pandey
दयार-ए-ग़म से हम बाहर निकल के शे'र कहते हैं मसाइल हैं बहुत से उन में ढल के शे'र कहते हैं दहकते आग के शो'लों पे चल के शे'र कहते हैं हमें पहचान लीजे हम ग़ज़ल के शे'र कहते हैं रिवायत के पुजारी इस लिए नाराज़ हैं हम से ख़ता ये है नए रस्तों पे चल के शे'र कहते हैं हमें तन्हाइयों का शोर जब बेचैन करता है इकट्ठी करते हैं यादें ग़ज़ल के शे'र कहते हैं सितारों की तरह रौशन हैं जिन के लफ़्ज़ ज़ेहनों में वो शायद मोम की सूरत पिघल के शे'र कहते हैं हमारी शाइ'री उस को कहीं रुस्वा न कर डाले सो उस के शहर में थोड़ा सँभल के शे'र कहते — Balmohan Pandey