रवानगी में समय का ख़याल करते हैं

फिर उस को भेज के पहरों मलाल करते हैं

ज़रा से तल्ख़-बयानी पसंद हैं फिर भी
उदास लोग मोहब्बत कमाल करते हैं

अब उन को इश्क़ के आदाब कौन समझाए
बुझे चराग़ हवा से सवाल करते हैं

गुनह है इश्क़ पे पाबंदियाँ बजा लेकिन
तुम्हारे लोग तो जीना मुहाल करते हैं

इस एक जुमले ने करने नहीं दिया कुछ भी
जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

— Balmohan Pandey

More by Balmohan Pandey

Other ghazal from the same pen

See all from Balmohan Pandey →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling