सारी दुनिया की निगाहों से बचाकर रखना,
अपनी आँखों में ही हर दर्द का ज़ेवर रखना
उस को आदत ये परेशान बहुत रक्खेगी,
उस की आदत थी मेरा हाथ पकड़ कर रखना
इस का क्या शिकवा उसे रोक नहीं पाए हम,
एक मुफ़लिस को कहाँ आता है ज़ेवर रखना
हाए! वो इश्क़ छिपाने के ज़माने मोहन!
याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
— Balmohan Pandey















