sab ke honton pe ye marne ki duaaein kaisi | सब के होंटों पे ये मरने की दुआएँ कैसी

  - Balmohan Pandey

सब के होंटों पे ये मरने की दुआएँ कैसी
चारागर तू ने हमें दीं हैं दवाएँ कैसी

एक ही पल में बदलते हैं मनाज़िर क्या क्या
हम तिरी आँखें बनाएँ तो बनाएँ कैसी

मय-कशी छोड़ दो जब भूल चुके हो उस को
अब शिफ़ा मिल ही गई है तो दवाएँ कैसी

ऐसे हालात में हँसने की तमन्ना किस को
ऐसे माहौल में जीने की दुआएँ कैसी

अंधे लोगों को सुना देते हैं उस का चेहरा
आप के लोग भी देते हैं सज़ाएँ कैसी

हँसते-गाते भी उदासी नहीं छोड़ी मैं ने
छोड़ देती हैं जो बच्चों को वो माएँ कैसी

  - Balmohan Pandey

Sad Shayari

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